V for vendetta : story about Hero from people .

V For Vendetta : Story About Hero From People . जिसने भी v for vendetta फ़िल्म देखी हैं वे कभी इसको भुला नहीं पाते , क्योंकि ये फ़िल्म तो हैं ही लेकिन ये एक नंगा सच भी कहती हैं । उसके क्वोट बहुत ही ज़्यादा तेज धार हैं जो सीधे आपके दिल में उतर जाते हैं । बस शर्त यह है कि आप के पास दिल होना चाहिये !

फ़िल्म की स्टोरीलाइन की बात करे तो ये फ़िल्म एक ऐसे नायक की बात है जो भविष्यवादी, स्वतंत्रता सेनानी है । जिसे केवल वी के नाम से जाना जाता है । वह दमनकारी समाज से लड़ने के लिए आतंकवादी रणनीति का उपयोग करता है। Evey जो इस फ़िल्म की हिरोइन है वह उसे सरकार को नीचे लाने के अपने मिशन में सहायता करती है।

V for vendetta
V for vendetta

V for vendetta मूवी वैसे तो एक सामान्य इंसान की कहानी है लेकिन वह खुद असामान्य होता हैं । आप जैसे ही इसको देखने की शरूआत करते हो आपको लगेगा कि हाल में चल रहे लोकड़ाऊन जैसा सिन आपको दिखता है । आपको लगता है कि ये शायद इसी से जुड़ी है । लेकिन जैसे ही फ़िल्म की अभिनेत्री को तीन लोग रोककर उसे परेशान करने की कोशिश करते है एक नकाब पहने हुए हीरो की एंट्री होती हैं । कुछ जोकर जैसा लेकिन जोकर जैसा नही । एक बिना संवेदना का चेहरा जो जब बात करता है तब लगता है कि उसके एक एक शब्द सीधे आपके दिल के आरपार चलते है । तलवार से उन तीनों को सबक सिखाकर वह उस हीरोइन के साथ एक मकान की छत पर एक स्टेच्यू को उड़ा देता है । उस वक्त बजने वाला संगीत उस कर्फ्यू में मानो किसी मातम जैसा लगता है । ये कोई सामन्य बात नहीं थी क्योंकि 5 तारीख को पूरी एसेम्बली उड़ाने की बात जब वह सुनाता है तो सब राज नेताओ की नींद उड़ा देता हैं ।

फ़िल्म की आगे की बात करे उससे पहले उसके बारे में कुछ बाते जान लेते है :

प्रारंभिक रिलीज: 23 फरवरी 2006 (फिनलैंड)

निर्देशक: जेम्स मैकटेक्स्ट

बॉक्स ऑफिस: 13.25 करोड़ अमरीकी डालर

पुरस्कार: सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए एसएफएक्स पुरस्कार, अधिक

स्टोरी बाय: एलन मूर, डेविड लॉयड

टीवी पर लाइव आकर अपने कारनामा को बताने वाला शायद के नकाबपोश सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है । सब उस ऑफिस तक पहुंचते है जहां से वह उस प्रोग्राम को दिखा रहा होता है तो वहां पर कई सारे नकाबपोश मिलते है लेकिन उनके पीछे के चेहरे उन्ही के अफसरों के थे । उन सबको चकमा देकर वहां से निकलने वाला ही होता है कि एक ऑफिसर उसे रोक देता है तब फ़िल्म की हिरोइन उसे न जाने क्यों उस पर वार करके उस नकाबपॉश को बचा लेती है लेकिन बदले में वह ऑफिसर उसे बेहोश कर देता है । उस वक्त क्या करे इस कशमकश में आखिर नकाबपोश उसे अपने साथ ले जाता है । जब वह होश में आती है तो वह एक जमीन के नीचे बने घर में होती है जो कुछ असामान्य था ।

जब वह होश में आकर बाहर आती है तो वह नकाबपोश कुछ खाना बना रहा होता है । उसके जले हुए हाथ देखकर वह कुछ समझ नही पाती । उसे देखकर नकाबपोश तुरंत हाथ के ग्लव्ज पहन लेता है और फिर चलती है बातों की सैर ! दोनों में जो डायलॉग चलते है वह किसी को भी अपना दीवाना कर देता है जैसे कि :

‘ कलाकार ‘ झूठ ‘ बोलते है ‘ सच ‘ कहने के लिए ! ‘

‘ लोगो को सरकार से नही डरना चाहिए , सरकार को लोगो से डरना चाहिए । ‘

‘ क्योंकि आइडिया बुलेटप्रूफ होते है । ‘

इस मास्क के पीछे सिर्फ और सिर्फ मांस है। इस मास्क के नीचे एक आइडिया है … और आआइडिया बुलेटप्रूफ होते हैं।

हर कोई खास है। सब लोग। हर कोई एक नायक, एक प्रेमी, एक मूर्ख, एक खलनायक है।

कलाकार सच बोलने के लिए झूठ का इस्तेमाल करते हैं। हां, मैंने झूठ पैदा किया। लेकिन क्योंकि आप यह मानते है कि आपने अपने बारे में कुछ सच पाया।

सुख सबसे कपटी जाल है ।

आप किसी को बस मुखौटा पहना दीजिये , फिर आप उससे सच सुन पाएंगे ।

नाच के बिना होने वाली क्रांति , क्रांति नही होती ।

कोई संयोग नहीं हैं, केवल संयोग का भ्रम है ।

कोई निश्चितता नहीं है, केवल अवसर है। ”

मेरे साथ जो किया गया उसने मुझे पैदा किया। यह ब्रह्मांड का एक मूल सिद्धांत है कि प्रत्येक क्रिया एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया के कारण बनती है। यह वास्तव में है कि आप इसे कैसे देखते हैं? एक समीकरण की तरह …?

आप क्या करना चाहते है वो नही आप ने जो किया है उसके लिए मैं यहां पर आया हु । ए कोई संयोग नही बस संयोग का भ्रम है ।

ऐसे ऐसे तो कई डायलॉग है जिसे आप भूल नही पाते । हीरोइन के आईकार्ड से ही एक हत्या को अंजाम देता है नकाबपोश । बाद में उसे कहता है 5 तारीख यानी एक साल तक उसे यही रहना है । हीरोइन के माता पिता को भी बचपन में ही मार डाला गया होता है। वह भी परेशान होती है ।

बाद में जब वह पकड़ी जाती है तो उससे नकाबपोश के घर के बारे में उसके बारे में बताने के लिए कहा जाता है । वह मना कर देती है । तब उस पर जुल्म ढाए जाते है । उसके बाल काटकर उस उसे मरने की हद तक तड़पाया जाता है । जब वह जेल में एक टिस्यू पेपर पर लिखी कहानी पढ़ती है तो वह मरने के लिए भी तैयार हो जाती है । उसका डर निकल जाता है । आखिर में उसे कहा जाता है कि उसे आजाद कर दिया गया है । जैसे ही वह बाहर आती है वह उसी घर मे होती है जहां पर नकाबपोश उसे लाया था। उस पर उसी नकाबपोश ने जुल्म ढाए थे लेकिन उसका डर निकालने के लिए । वह बाहर आती है । उस बरसते पानी मे उसका नया जन्म होता है । जैसे आग की लपटों में उस नकाबपोश का जन्म हुआ था। केमिकल के टेस्टिंग में उसे ऐसा झझोड़ दिया था कि वह बस एक मांस का टुकड़ा ही रह गया था । मास्क के नीचे बस गला हुआ मांस ही था ।

आखिर में वह उस चान्सलर को मार देता है । उसे वैसा बनाने वाले हर एक को वह मौत के घाट उतार देता है । आखिर में जब उसे कहा जाता है कि तुम्हारे पास कुछ छुरे हैं हमारे पास बंदूक है तुम्हे मार देंगे । तब वी कहता है जब तुम्हारी बंदूक की गोलियां खत्म हो जाएगी तब मैं तुम सबको मार दूंगा। उस पर गोलियां बरसाई जाती है । जब गोलियां खत्म हो जाती है तब वह कहता है , ‘ अब मेरी बारी ! ‘ और जो सिन वहां है उसे तो बस आप देखते रह जाएंगे।

सबको मौत के घाट उतार देता हूं। दस साल से जो तौयारी वह कर रहा था वह ट्रैन पटरी सब तैयार था । वापिस तो आता है लेकिन दम तोड़ देता है । हीरोइन उस ट्रेन को चला देती है। वहा पर आया पोलिस अफ़सर भी उसका साथ देता है । 5 तारीख को ठीक 12 बजे पूरी एसेम्बली को उड़ा दिया जाता है। नकाबपोश के भेजे नकाब पहनकर सब लोग उसे देखते है । उनको मारने आई पूरी सेना बस देखती रहती है । और आकाश में चली आतिशबाजी में बस वी दिखाइ देता है ।

एक खतरनाक अंत ! मूवी ऐसे चलती है जैसे कोई नदी । सीधी बात नो बकवास ! एक के बाद एक ट्विस्ट और अफलातून एडिटिंग आपको उसे छोड़कर नही जाने देते । एक बार देख ले । सरकार क्या करती और लोग क्या कर सकते है ! इसका जवाब आपको मूवी में मिल जाएगा । इस मूवी के सब डायलॉग में से जो बेस्ट है ऐसे दो डायलोग के साथ बात पूरी करते है ।

लोगो सरकार से नही डरना चाहिए ,

सरकार को लोगो से डरना चाहिए । ‘

कलाकर झूठ बोलते है , सच कहने के लिए !

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