हमिंग बर्ड : हर दिन कयामत का !

हमिंग बर्ड : हर दिन कयामत का !

हमिंग बर्ड : हर दिन कयामत का !

यूरोपीय खोजकर्ता जब उन्नीसवीं सदी में पहली बार दक्षिण अमेरिका में पहुंचे तब फूलों पर हेलीकॉप्टर की तरह मंडराते अपरिचित पक्षी को देखकर मुग्ध हो गए थे। पक्षी हवा में स्थिर रह सकता है और यदि आवश्यक हो तो आगे पीछे उड़ सकता है इस प्रकार की गति बारे में उन्होंने कभी देखा या सुना नही था। रंगीन चिड़ियों के पंखों के फड़कने से कर्कश आवाज होती थी । उन्होंने जीवविज्ञानी का इंतजार नहीं किया और उस चिड़िया को हमिंगबर्ड नाम दे दिया आ। कुछ अध्ययन के लिए न केवल उन्होंने हमिंगबर्ड को यूरोप ले जाने की कोशिश की । लेकिन समुद्री यात्रा को कोई पक्षी सहन नही कर पाया । हर पक्षी का दिल नींद में ही जैसे वह सो गया और भी नहि जगा।

अंत में 20 वीं सदी की शुरुआत में पहला हमिंगबर्ड ने इंग्लैंड के तटों को देखा। लंदन में चिड़ियाघर में उसे एक विशेष आकर्षण के रूप में प्रदर्शित किया गया । जहां कई लोग ने उसके हवा पर उनका प्रभुत्व देखा । चमकीले इंद्रधनुषी रंग उनके लिए अवलोकन या जीवित ट्रायथलेट ग्लास के कारण दृष्टान्त प्रकाश को सात रंगों में विभाजित करता है, जैसे त्रिपिटक काँच धूप के संपर्क में आने के बाद हमिंगबर्ड के पंख कई रंगों में चमकदार थे। संग्रहालय में उसे रखने वालों को उसकी जरूरतों का कोई ज्ञान नहीं था, इसलिए उसकी ठीक से देखभाल नहीं कर सके । एक बार रात को सोने के बाद सुबह वह उठा ही नही । पक्षी विज्ञानीओ को विचार आय कि सभी हमिंगबर्ड की मृत्यु एक ही तरह से क्यों होती हैं ? हरेक की नींद मौत की नींद क्यो बन जाती हैं ?


इस पहेली का जवाब डेनिश जीवविज्ञानी डॉ जॉन स्टीफंस ने ब्राजील में हमिंगबर्ड का अध्ययन करके दिया।
आज तक पक्षीविदों के लिए पहेली अजीब थी तो जवाब तो उससे भी अदभुत था ।

रात में सोते समय हमिंगबर्ड उसके शरीर की हर क्रिया को धीमा करता है, दिल की धड़कन और शरीर के तापमान का स्तर समग्र रूप से कम करता है। निहितार्थ यह है कि इसके चयापचय की गति बहुत कम हो जाता है । हमिंगबर्ड सुषुप्त निद्रावस्था में चला जाता है । इस हालत में सुबह फिर से सक्रिय होने के लिए हमिंगबर्ड को शक्ति का करना पड़ता है । अगर पर्याप्त शक्ति का जत्था उसके शरीर मे हो तओ ठीक है अन्यथा हमिंगबर्ड फिर से
सो जाता है – और वह नींद हमिंगबर्ड के लिए मौत की नींद साबित होती है।

हमिंग बर्ड

इस तरह हर सुबह मौत से लड़े बिना हमिंगबर्ड जी नही सकता । क्योंकि निर्माता उसके शरीर काप्लानिंग बहुत खतरनाक तरीके से किया है। उसके लिए जीवन का संघर्ष अत्यधिक मुश्किल भरा बनाया है । पक्षी समुदाय के अन्य सदस्य कीड़े, फल, मछली, बीज, फलियां, मांस आदि खाने से पेट भरते है। ये खाद्य पदार्थ सुलभ नहीं हैं, फिर भी वे लगातार खोज में उड़ना भी जरूरी नहीं है। उड़ते समय लगातार पंख फड़फड़ाना भी जरूरी नहीं है। अल्बाट्रॉस अपने पंख फड़फड़ाए बिना 8 घंटे तक लगातार उड़ सकता है लेकिन निर्माता ने हमिंगबर्ड को फूलों के रस को मुख्य आहार के रूप में निर्धारित किया है और उस जूस पीने के लिए पॉली स्ट्रॉ जैसी लंबी चोंच उसे दी जाती है। बस यहीं से हमिंगबर्ड की मेहनत शुरू होती है। अन्य पक्षी हवाई जहाज की तरह उड़ते हैं, लेकिन फूलों का रस इस तरह उड़ते हुए नहीं पी सकते । उसके लिए हेलीकॉप्टर की तरह स्थिर उड़ना जरूरी है जिसके लिए पंखों को लगातार फड़फड़ाना भी जरूरी है । कुल 320 तरह के हमिंगबर्ड में से ज़्यादातर के पंख एक सेकंड में 50 से 75 बार फड़फड़ाते है । यानी की 3000 से 4500 बार प्रति मिनट ! स्वाभाविक रूप से ऐसा करने के लिए हमिंगबर्ड छाती में मजबूत पेशी होती हैं। जिसका वजन शरीर के 1/3 जितना होता है। किसी अन्य पक्षी को ऐसी मांसपेशियां नहीं, विंग को सक्रिय रखने के लिये ये भरपूर शक्ति के इस्तेमाल करते है ।

भरपूर यानी कितनी ! औसतन 75 किलोग्राम का मनुष्य 24 घंटे में लगभग 3,500 कैलोरी ग्रहण करता है। शायद कम लेकिन इससे ज्यादा नहीं । रोज गुनगुनाते हमिंगबर्ड हरदिन 1,50,000 कैलोरी का व्यय करता है । प्रोटीन, वसा, खनिज और विटामिन की भरपाई करने के लिए कीड़े पकड़ने पड़े वह अलग ! इसके उपयोग को देखते हुए हर जैविक क्रिया जो ‘टॉप-गियर’ में होती है । स्वाभाविक है। दिल एक मिनट में 130 बार धड़कता है।शरीर के वजन के अनुपात में मानव हृदय की तुलना में यही वजह है कि प्रकृति ने उनके दिल का वजन 7.5 फीसदी रखा है ।।एक शुतुरमुर्ग का दिल 0.1 प्रतिशत होता है। मजबूत और बड़ा हृदय का आकार मांसपेशियों में भरपूर ऑक्सीजन भेजना होता है। हमिंगबर्ड के फेफड़े भी एक लोहार की धौंकनी की तरह चलते हैं।


डॉ जॉन स्टीफेंस के साथ एक प्रयोग ने औसतन हमिंगबर्ड का एक ग्राम फेफड़ों में प्रति घंटे आधा लीटर ऑक्सीजन भरता है। यदि आप प्रति ग्राम की गणना करते हैं तो अगर आप गिनें तो यह आदमी के उपभोग से 10 गुना ज्यादा है । इस प्रकार प्रत्येक अंग बेहद सक्रिय रहता है । यही कारण है कि हमिंगबर्ड का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो सकता है । (108 फ़ारेनहाइट) स्तर, जो मनुष्य के लिए बुखार है ।नियम यह है कि शरीर की सामान्य बनावट की तरह शरीर में अधिक ताजगी, शक्ति और जीवन शक्ति ज़्यादा होती है ।

दूसरी ओर हमिंगबर्ड्स भी दुकालिये जैसे खाते है । यदि एक स्वस्थ व्यक्ति प्रतिदिन 1 किलो भोजन खाता है । हमिंगबर्ड की तरह उसे अपनी ऊर्जा खर्च करनी हो तो उसे प्रतिदिन 150 किलो मांस या 165 किलो उबला हुआ आलू या 60 किलोग्राम ब्रेड खाए बिना नही चलेगा । हमिंगबर्ड इसलिये 2,000 फूलों का शर्करायुक्त रस 12 घंटे तक सीधे उड़ान भरकर सुगन्धित रस निगलना पड़ते हैं। चयापचय का तीव्र वेग का यही तकाज़ा है। यह पक्षी अपनी ऊर्जा को तेज करता है । पेट में भोजन भी तेजी से पचता है। पेट भरना इसलिए जब वह खाता है, तो उसे उपवास और पंखों को खाना पड़ता है । पवनचक्की में जाने से फिर से ऊर्जा की गति बढ़ जाती है। यह एक दुर्भाग्य है ।

यह कहना गलत नहीं है कि हमिंगबर्ड कैलोरी का लापरवाही से हो रहे उपयोग को पूरा करने के लिए अनियंत्रित उत्पादन जारी रखना पड़ता है। मानव शरीर में अगर हमिंगबर्ड जितनी कैलोरी का उत्पादन करे तो रक्त का तापमान उबले हुए पानी जितना हो जाये। उसबिंदु तक पहुंचने से रोकने के लिए उन्होंने प्रति घंटे 100 रतल पसीना बाहर निकलना चाहिए । अतिरिक्त गर्मी का निपटान हमिंगबर्ड के लिए, सवाल नहीं उठता है, क्योंकि इसके शरीर में इनका उत्पादन होने पर कैलोरी खर्च होती है।

अब इस पृष्ठभूमि में एक बहुत ही दिलचस्प सवाल : हमिंगबर्ड दिन के दौरान 2000 फूलों का शर्करा रस
से भट्ठी जलाकर रखता है, लेकिन रात का क्या? पूरे दिन जहां लाखों कैलोरी की खपत होती है नींद में कुछ हजार भी होने चाहिए की नही ? तो उसके लिए सामने हमिंग बर्ड पेटपूजा शरू तो नही रख सकता ।

बिजली की खपत केवल एकतरफा यातायात चलती है। हमिंगबर्ड चयापचय को खर्च कम करने के लिए।वेग को भी कम करता है। लगभग 40 सेल्सियस के तापमान को वह 13.3 सेल्सियस तक ला डेटॉ है । फेफड़ों में 50 से 100 गुना ऑक्सीजन कम भरता है। दिल की धड़कन 1440 के बजाय 36 तक ला देता हैं। संक्षेप में ऊर्जा का उपयोग नहीं किया जाता है। लेकिन यह मामला हमिंगबर्ड के लिए जीवन और मृत्यु का है । इसलिए रात को सुप्त नींद में चयापचय का स्तर यथासंभव कम रखता है । आश्चर्यजनक रूप से, सुप्त चयापचय भी सुप्त नींद में होता है । लेकिन वह भी कबूतर से 12 गुना अधिक, मुर्गी से 25 गुना अधिक है और एक हाथी की तुलना में 100 गुना तेज, इतना ही लगभग मृत्यु की स्थिति में भी, शक्ति संतुलन में गिरावट जारी रहती है।

हमिंगबर्ड का शरीर आखिरकार सुबह जल्दी परीक्षण पर चढ़ता है। मृत दशा त्याग ने के लिए, जागने के लिए और
फिर से उड़ान भरना उनके लिए समान चुनौती है, डॉ। जॉन स्टीफेंसन कहते हैं कि जब तक चयापचय दर धीमी रहती है हमिंगबर्ड होश में ही नही आता हैं। दिल की धड़कन में, वह श्वसन दर और शरीर के तापमान में गिरावट होती है । उसे वापिस बढ़ाना पड़ता है जिसके लिए कुछ समय चाहिए। जिसके लिए वह अपनी छोटी से काया को हिलाता है। ठंड से निपटने का तरीका पूरे शरीर को गर्म करने के लिए हिलाता है। पूरी तरह से जागना हो तो शरीर के तापमान को 40 ° सेल्सियस तक वापस गर्मी पहुंचानी पड़ती है । यह तापमान 15-20 मिनट कंपकंपी मुश्किल से हासिल की जाती है और इस बीच वह उड़ने की ऊर्जा बर्बाद करता हैं।

एक छोटे से शरीर में अगर की रात भर की ताकत को संग्रहीत नहीं की जाती तो हमिंगबर्ड जागने के लिए एकमात्र अवसर होता है। सर्दियों की सुबह मोटर इंजन शरू हो जाये तो अच्छा वरना बैटरी उतर गई तो इंजिन को स्टार्ट नही कर सकते । उसी तरह हमिंगबर्ड एकमात्र मौका मिलता हैं। उसे गवाने के बाद वह कोई चेतना प्राप्त नहीं कर सकता है। फिर से वह सो जाता है – हमेशा के लिए!

यह आमतौर पर ऐसा नहीं होता है। सुबह चहकते पक्षियों में हमिंगबर्ड भी उड़ता है, लेकिन अगली सुबह तक ! क्योंकि फिर से उसे उसी ‘कयामत का दिन ‘ पार करना पड़ता हैं ।

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