भारत के 12 अद्भुत स्थान

भारत के 12 अद्भुत स्थान

भारत मे सबसे ज्यादा सफर करने वाली कोई प्रजा है तो वह है बंगाली और गुजराती ! फिर भी दोनों की सफर करने की अपनी एक अलग पद्धति है । बंगाली उनकी जिज्ञासा और ज्ञान पिपासा को संतोष ने के लिए अनजाने जगहों की मुलाकात करते है और तो और उस जगह की मुलाकात करने से पहले उस स्थान की जानकारी ले लेते हैं जबकि गुजराती की सफर मुख्य रूप से मौज और खाने पीने के लिए करते हैं । जिस स्थान की मुलाकात करते है उसमे कभी कभी वे बस यूं ही चले जाते हैं । अभ्यासु नजर से कभी देखते ही नहीं । परिणम ज्ञान प्राप्ति का कोई अवकाश नही रहता ! भारत की बात करे तो भारत के देखने लायक स्थानों की कोई कमी ही नही । आज हम कुछ ऐसे ही स्थानों की बात करेंगे !

01 चार अलग फॉल्स से बना जोगना फॉल्स !

धोध का प्रतीकात्मक चित्र

गोवा से लगभग 150 किलोमीटर दूर दक्षिण कर्नाटक में जोगना फॉल्स है जो भारत का सबसे ऊंचा फॉल्स है । सालो पहले उसका विपुल और वेगवान जलप्रवाह बहुत ही प्रभावशाली दृश्यों की रचना करता था । लेकिन हाइड्रो इलेक्ट्रिसिटी के लिए 95 किलोमीटर लंबी शरावती नदी पर बांध बनने के बाद फॉल्स जरा धीमा पड़ा है । फिर भी बारिश के मौसम के अंत में उसे देखना बड़ा मनमोहक होता है । वैसे जोगना धोध एक नही चार है और चारो के नाम भी अलग अलग है लेकिन आम तौर पर हम उसे जोगना फॉल्स ही कहते है। चारो के नाम देखे तो राजा , रोरर , रॉकेट और रानी नाम दिए गए है । सबसे ऊंचा धोध राजा है । जो 250 मीटर ऊंचा है । इस जल प्रपात का पानी 40 मीटर गहरे सरोवर में गिरता है। नीचे उतरकर सरोवर से राजा फॉल्स को देखे तो आप उस दर्शय को जीवन भर भूल नही पाएंगे !

02 दक्षिण के अजोड़ विठ्ठल मंदिर

मंदिर का प्रतीकात्मक चित्र

हम्पी का विठ्ठल मंदिर वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया गया है । जो हम्पी यानी प्राचीन विजयनगर के भूतपूर्व साम्रज्य का है । 500 साल से ज्यादा पुराना है । मंदिर के पतले स्तम्भ को आप धीरे से टपकी मार दे तो उस स्तम्भ पर जिस वाद्य की आकृति की नक्काशी की गई है उस वाद्य की आवाज आती हैं । विद्वान मानते है कि मन्दिर के कारीगरों ने आवाज की वैविध्यता लाने के लिये तरह तरह के बंधारण वाले पत्थरो का इस्तेमाल किया होगा !

03 सबसे विचित्र स्थापत्य !

प्रतीकात्मक चित्र

भारतीय पुरातत्व विभाग ने किए हुए सर्वे अनुसार सबसे ज्यादा स्थापत्य दिल्ली में है । लगभग 1300 जितने ! उनमे सबसे विचित्र स्थापत्य अजीतगढ़ है । जिसका मूल नाम मयूटीनी मेमोरियल था । सन 1857 के स्वातंत्र्य संग्राम को कुचलने के प्रयास में जिन अंग्रेजो की मौत हुई उन सैनिको की याद में ब्रिटिश सरकार ने उसे बनवाया था । सन 1972 में उसका नाम बदलकर अजीतगढ़ कर दिया गया । लेकिन अजीब बात ये की सरकार ने उन शहीदों के रूप में जांहिर किया जो सन 1857 के संग्राम में अंग्रेजो के सामने लड़ते वक्त शहीद हुए थे ! कितना विरुद्ध इतिहास !

04 भारत की राजाबाई टावर क्लॉक

क्लॉक टावर का प्रतीकात्मक चित्र

फ़रवरी 27 , 1880 के दिन दस साल की महेनत के बाद 4,00,000 ₹ के खर्च पर बना राजाबाई नाम का क्लॉक टावर मुंबई शहर का ट्रेडमार्क है । मुंबई के उस समय के धनिक प्रेमचंद रायचंद ने अपनी माता राजाबाई की याद में वह बांधकाम करवाया था । जिसमे 30,000 ₹ कीमत की घड़ी भी लगाई गई थी । जिसकी ऊंचाई 280 फिट है , घड़ी की मिनट की सुई 30 किलोग्राम वजन की है , घण्टे की सुई 40 किलोग्राम की है , और समय के टकोर करने वाला घण्टा 6 फिट ऊंचा है ।

05 उज्जैन की वेधशाला !

जयपुर के खगोल शास्त्री महाराजा जयसिंह देश ने अलग अलग जगह जंतर मंतर नाम की पांच वेधशाला बनवाई थी । जिसमे आज केवल उज्जैन की वेधशाला उपयोगी कार्य के लिए इस्तेमाल की जाती है । खगोलगणित के जानकार उज्जैन वेधशाला के प्राचीन उपकरण का इस्तेमाल करके ग्रहों की अवकाशी गतिविधियों का पंचांग तैयार करते हैं । अख़बार व सामयिक में आने वाला साप्ताहिक भविष्य लिखने के लिए उसी का आधार लिया जाता हैं ।

06 बरगद का पेड़ वह भी 240 साल पुराना !

बरगद का पेड़

हा , भारत के कोलकता में बोटनिकल गार्डन में 1775 वड़वाई से घिरा बरगद का पेड़ है । जो 240 साल पुराना है । पेड़ का घिराव 412 मीटर है , 3 एकड़ में वह फैला हुआ है । सन 1787 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने मूलभूत रूप से इस गॉर्डन को चाय के पौधे विकसित करने के लिए बनाया था । दार्जिलिंग व आसाम की जातवान चाय उन्होंने इस गार्डन में विकसाये थे । सन 1919 में आकाशी बिजली ने असल बरगद के पेड़ को लगभग जला दिया था । लेकिन बाद में उसकी टहनियों में पूरा विकास करके विशाल रूप ले लिया !

07 बिजापुर का गोल गुम्बज किस से बनाया गया ?

गुम्बज की प्रतीकात्मक तस्वीर

बीजापुर का गोल गुम्बज वास्तव में आदिल शाही सुल्तान का मकबरा है जो 38 मीटर व्यास का है । सबसे बड़ा विस्तार उसने घेर कर रखा है । लगभग 1682 वर्ग मीटर ! गुम्बज के नीचे बोले जाते शब्द 11 बार रिपीट होते हैं । एक मान्यता के अनुसार लगातार 11 बार आवाज सुनाई दे इसलिए उसकी आंतरिक सतह पर खास पदार्थो की परत चढ़ाई गई थी । सन 1659 में इस परत को बनाने के लिए कारीगरों ने घास की पतली तिलिया , गाय का गोबर , अंडे और गुड़ का मिश्रण इस्तेमाल किया था । अब उसकी कारण आवाज पैदा होता है ये तो भगवान जाने !

08 कलकत्ता की राइटर्स बिल्डिंग

पुरानी बिल्डिंग का प्रतीकात्मक चित्र

कलकत्ता का विक्टोरिया मेमोरियल सबसे प्रसिद्ध है लेकिन ईस्ट इंडिया कंपनी के ईतिहास के साक्षी जेसा राइटर्स बिल्डिंग उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है । ईस्ट इंडिया कंपनी ने सन 1870 में इसका बांधकाम करवाया था। तब वहां सरकारी कचहरी खोलकर कारोबार चलाया था । आज राइटर्स बिल्डिंग पश्चिम बंगाल का सचिवालय है। वैसे सन 1780 में थॉमस लियोन नाम के आर्किटेक अंग्रेज ने ये 57 ऑफिस कम कमरे वाला बिल्डिंग ईस्ट इंडिया कंपनी के हिसबनिशो के लिए बनाया था । एकसमान डिजाइन वाले 57 आवास वास्तव में तो फ्लेट थे और भारत मे फ्लेट पहली बार बनाये गए थे। ईस्ट इंडिया कंपनी के हिसाब निश उस समय writers राइटर्स के नाम से जाना जाता था क्योंकि उनका एक मात्र काम पैसा और माल के दस्तावेज लिखना था । तो उस बिल्डिंग को राइटर्स बिल्डिंग नाम दिया गया ।

09 सबसे लंबा रोप – वे

रोप वे का प्रतीकात्मक चित्र

अक्टूबर , 1993 में एशिया का सबसे लंबा रोप वे खोला गया जो 4.15 किलोमीटर जितना लंबा था । जिसमे 20 से 25 पैसेंजर को समाने वाली दो केबिन है । ये रोप वे बद्रीकेदार से 47 किलोमीटर दूर बना हुआ है जिसे रज्जू नाम से जाना जाता है । ये रोप वे 1917 मीटर ऊंचाई पर आये जोशी मठ को 3027 मीटर ऊंचाई पर के ओली के साथ जोड़ता है । रस्सी के आधार के लिए 10 टावर है । रस्सी से नीचे लटकती पैसेंजर केबिन मिनट के 38 मीटर के हिसाब से उपर चढ़ती है । ऊँचाई की दृष्टि से जोशीमठ ओली का रोप वे पूरे एशिया में दूसरे नंबर पर है ।

10 दुनिया से सबसे बड़े और वजनी झुम्मर

जूमर का प्रतीकात्मक चित्र

दुनिया के सबसे बड़े और भारी वजन के झुम्मर ग्वालियर के महाराजा सन 1874 में बने विजय विलास पैलेस में दरबार होल के लिए बेल्जियम से मंगाए थे । हरेक झुम्मर में 56 किलोग्राम सोने का इस्तेमाल किया गया है और हरेक का वजन 3500 किलोग्राम था। अब इतने भारी भरखम वजन के झुम्मर का वजन छत जेल पाएगी या नही इसलिए छत पर तीन हाथी को पुली से लटकाए गए थे !

11वजीर सुलतान की प्रोडक्ट

सिगारेट का चित्र ( तम्बाकू व सिगारेट का प्रयोग स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है । )

सन 1930 में बनी हैदराबाद की वजीर सुल्तान की कंपनी ने हैदराबाद के चार मीनार का नाम अपनी सिगारेट के ब्रांड नेम के रुप मे इस्तेमाल किया था । साथ ही उसका चित्र भी था । तब चार मीनार हैदराबाद राज्य का ऑफिशियल सिम्बोल था । जिसकी आकृति उस राज्य के सिक्कें और चलनी नोट्स पर भी मुद्रित की जाती थी । इसलिए वजीर सुलतान कंपनी ने सिगारेट के लिए उस सिम्बोल का इस्तेमाल करने के लिए निजाम की मंजूरी लेनी पड़ी थी ।

12 भारत का पिंक सिटी

हवामहल ( जयपुर का सिम्बोल ) ( image from freepik )

पिंक यानी गुलाबी रंग अतिथि के स्वागत का प्रतीकात्मक रंग है । इसलिए सन 1853 में रानी विक्टोरिया के पति प्रिंस अल्बर्ट जयपुर की मुलाकात पर आये तब पूरे शहर को उस समय के महाराजा ने गुलाबी रंग से रंग दिया । यह रंग बाद में जयपुर का पहचान चिन्ह बन गया और जयपुर भारत का पिंक सिटी बन गया !

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