भारत के शहरों का इतिहास !

भारत के शहरों का इतिहास !

वैसे भारत खुद एक इतिहास है , लेकिन आज हम भारत के कुछ शहरों के बारे में बात करने वाले हैं । जो कुछ खास इतिहास को संजोकर बैठे है । जैसे कि सन 2010 में अहमदाबाद शहर 600 साल का हुआ । उस ख़ुशी में उस शहर का जन्मदिन भी मनाया गया । वास्तव में अहमदाबाद शहर सुल्तान अहमद शाह ने सन 1411 में बसाया था । हालांकि वास्तव में ये शहर आशावल नाम का एक नगर था जो 11 वी सदी से ही अस्तित्व में था । ख़ैर ये बात हुई अहमदाबाद की , आज हम भारत के ऐसे ही कुछ शहरों के बारे में बात करने वाले है ।

01 भारत का सबसे प्राचीन शहर

भुवनेश्वर

भारत का सबसे प्राचीन शहर उड़ीसा का भुवनेश्वर है । जिसे Temple Town of India कहा जाता है । एक समय भुवनेश्वर में अद्भुत कारीगरी के 1000 से भी ज़्यादा मंदिर थे । लेकिन मुगल काल मे कई मंदिरों का खंडन हुआ । अंत मे 600 जितने ही मंदिर बच पाए । भुवनेश्वर की स्थापना के बाद बने कुछ मंदिर तो 1400 साल से भी पुराने है । सबसे भव्य मंदिर 54 मीटर ऊंचा त्रिभुवनेश्वर अर्थात तीन लोक के ईश्वर का है । शहर का नाम उसी के अधार पर रखा गया । त्रिभुवनेश्वर के 22,500 वर्ग मीटर के प्रांगण में दूसरे 50 छोटे छोटे मंदिर है !

02 सुरत का इतिहास

सुरत

सन 1496 से पहले आज के सूरत शहर का कोई अस्तित्व नही था । जब कि तीन किलोमीटर दूर रांदेर में व्यापारी कारोबार बड़े पैमाने पर चलता था। जहां से माल को विदेश भेजा जाता था । पंद्रहवीं सदी के अंत मे गोपी नाम का अनावली या नागर ब्राह्मण वो स्थान पर आया जहां समय जाते सूरत शहर बसने वाला था । और गोपी उसका स्थापक बनने वाला था । यहाँ पर वह व्यापार करना चाहता था । इसलिए पहले बसने के लिए एक छोटा सा घर बनाया । बाद में रांदेर से कुछ व्यापरियों को बुलाया और पूरा विस्तार बसाया ! उस एरिया का आज का नाम गोपीपुरा ! जब कि उसकी पत्नी के नाम से तालाब बनाया । ये विस्तार बहुत विकसित नही हुआ क्योंकि ज़्यादातर व्यापारी रांदेर छोड़ने के लिए तैयार ही नही थे। कुछ समय बाद एंतोनियो द सिल्वेरा के पोर्तुगीज सरदार ने बारी बारी से दो बार रांदेर पर हमले करके आग लगा दी । तब व्यापारी गोपी पूरा में बस ने गए। तब जाकर सूरत आकार लेने लगा । बाद में सन 1609 में ब्रिटन की. ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपनी पहली कोठी सूरत में बनाई । हालांकि गोपी ने सूरत के लिए ‘ सूरत ‘ के बदले दूसरा नाम पसंद किया था वह था – सूरज ! क्योंकि सूर्यपूजा करने वाला ब्राह्मण था । नामकरण की मंजूरी लेने के लिए वह सुल्तान से मिला । ज़्यादातर मुलाकत के दौरान सूरज के साथ सूर्यपुर भी सुजाया ! मुस्लिम का आधिपत्य जिसमे व्यक्त होता हो ऐसे ही लेबल की स्वीकृति देने के लिए सुल्तान तैयार था । सूरज आखिर में सूरत बना ! लंबे मुस्लिम शासन काल के बाद शब्द में बदलाव आया और सूरत सुरत बन गया ।

03 जयपुर का इतिहास

जयपुर

राजपुताना में 17 वी सदी के दौरान अम्बर नाम की पहाड़ी पर राजा का किल्ला था । महल कहे तो महल जो था वही था । क्योंकि मुगलों के लगातार होते रहते आक्रमण को देखते हुए मैदानी भूमि पर रहना सुरक्षित नही था । सन 1727 में मुगल साम्राज्य टूटने के बाद अम्बर के तत्कालीन राजा महाराजा जयसिंह द्वितीय ने उस पहाड़ी के पास मैदान में दूसरा नगर बनाने का निर्णय लिया । समस्या ये आई कि बांधकाम के लिए राज्य में आरसपहान नही था और रेत के पथ्थर भी नही थे । पड़ौशी राज्य में थे लेकिन जयसिंह के सबंध उनके साथ अच्छे नही थे। आख़िर में Quartize नाम के पथ्थर से नगर को बनाया गया । जिसके कारण वह थोड़ा फ़िक़्क़ा सा बना ! सालो बाद इंग्लैंड का राजकुमार एडवर्ड सातवा जब 1883 में भारत की मुलाकात लेने के लिए आया तो उसके सफर में जयपुर भी था । उस समय जयपुर के राजा रामसिंह ने पूर्व तैयारी के रुप मे पूरे शहर को गुलाबी रंग से रंग दिया ! वैसे सफेद रंग भी लगाया जा सकता था लेकिन उससे राजकुमार की आंखे चौंधला सकती थी । उस समय आगे जाकर ध टाइम्स ऑफ इंडिया के तंत्री स्टेनली भी थे। बाद में उन्होंने 1905 में इस मुलाकात को अपनी किताब में लिखा तब जयपुर के लिए pink city शब्द का प्रयोग किया। हालांकि जयपुर कभी पूरा गुलाबी रंग का नही था । कुछ प्राचीन स्थापत्य को गुलाबी रंग से रंगे गए । बाकी तो वहां की मिट्टी brown या बदामी रंग की होती है । स्टेनली ने तो बस आंलकारिक भाषा मे जयपुर को पिंक सीटी कहा था ये बहुत कम लोग जानते हैं।

04 अमृतसर का इतिहास

अमृतसर

पौराणिक कथा के अनुसार कुरुक्षेत्र के मैदान में युद्ध के दौरान मूर्छित हुए भीम को होश में लाने के लिए कुछ जोजन दूर के सरोवर से पानी लाकर भीम पर छिड़का गया । वाल्मीकि और वेद व्यास भी उस सरोवर के आसपास के शांत विस्तार में रहे थे । सन 1738 के बाद मुगलों ने उस पवित्र सरोवर को मिट्टी से भर दिया था ।सन 1762 में उसे फिर से खोदा गया लेकिन हमलावरों ने उसे कूड़े कचरे से दूषित कर दिया इतना ही नही वहां गनपावडर का इस्तेमाल करके वहां के धर्म स्थान को बहुत नुकशान करवाया ! आज उस शहर के आसपास शहर बसा हुआ है जिसका नाम है अमृतसर ! जो अमृतजल सरोवर का भी है । जिसके बीच मे सुवर्ण मंदिर है ! सन 1577 में शिखो के चौथे गुरु अर्जुनदेव ने सरोवर के जल को अमृत बताया था। मुगल बादशाह जहांगीर शिख के प्रति सहिष्णु नही था तो उसे अर्जुनदेव की हत्या कर दी । जब कि औरंगजेब ने गुरुतेग बहादुर का शिरच्छेद करवा दिया था । सन 1738 के बाद तमाम अमृतसर शहर मुगलों के कब्जे में आया । सुवर्ण मंदिर की मुलाकात पर जाने वाले हरेक यात्रालु को मौत की सजा दी जाने लगी । दस साल बाद शिखो ने फिर से अमृतसर जीत लिया । वैसे अंग्रेज तो उस मंदिर को चर्च में बदल देना चाहते थे , मंदिर को दूषित कर वहां कत्लखाना भी बनाया था । इस गुस्ताखी का शिखो ने विरोध किया , लड़े । आखिर में सब 1925 मे अंग्रेजो ने सुवर्ण मंदिर का हवाला शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी को दे दिया !

05 मुंबई

मुंबई

भारत के पश्चिम किनारे अरबी समुद्र में सिलेटिया या बदामी रंग की मछली मिलती है जिसके स्थानिक नाम Bombay Duck का अपभ्रंष करके अंग्रेजो ने मुंबई नाम कर दिया । वैसे नाम से तो कोई उसे मुंबई होने वाली बतख ही मान लेगा !

सालो पहले मुंबई शहर उस समय था ही नही । मुंबई सिर्फ मछवारो की बस्ती थी । एकदूसरे से दूर 7 द्वीप थे । मछवारो कि देवी मुम्बादेवी थी । जो द्वीपो की स्थानिक देवी थी । रही बात मछली की तो मराठी में उसे बोम्बिल शब्द था । गुजराती में उसे बुमला कही जाती है । विदेशियों ने इस बोम्बिल का बॉम्बे कर दिया । और इसी बॉम्बे से आज का मुंबई हुआ !

06 काशी का इतिहास

काशी विश्वनाथ

ब्रिटिश राज के वायसरॉय लार्ड कर्जन ने सन 1902 में इंडियन स्टैंडर्ड टाइम को रेखांकित करने के लिए रेफरेंस पॉइंट के रुप मे अलाहाबाद की पसंदगी विवादास्पद हुई । क्योंकि हिन्दू प्रजा को उस शहर से विरोध था। विरोध भी इन हद तक कि मुंबई उस विषय पर हुई सभा मे 15000 लोग इक्कठे हुए थे । हिन्दू उस शहर के नाम से ही चीड़ जाते थे। हिन्दू अलाहाबाद से 135 किलोमीटर दूर के शहर को पवित्र मानते थे। उसे वे रेफरेंस पॉइंट बनाना चाहते थे । जो था काशी यानी वारणसी !

वाराणा और असी नदी पर बसा काशी हिंदुओ की पसंदगी था । बनार नाम के राजा ने उसकी स्थापना की थी । जिसे बनारस भी कहा जाता हैं। आज से सौ सवा सौ साल पहले वयोवृद्ध हिन्दू मोक्ष प्राप्ति के लिए जीवन के आखरी साल बनारस में बिताने जाते थे। यहां पर कोसी मार्ग की परिसीमा के बीच बने विश्वनाथ मंदिर के पास आखरी समय मे रहे तब ही मोक्ष मिलता है ऐसा कहा जाता है । हालांकि सन 1905 में स्टैंडर्ड टाइम के लिए अंग्रेजो ने अलाहाबाद ही पसंद किया !

07 एक साथ 300 शहरो का नाम बदलने वाला राज्य

केरल

सन 1980 में साम्यवाद की ओर ढलने वाली केरल सरकार ने ब्रिटिश साम्रज्यवाद के बाकी रहे अवशेष को मिटाने के लिए अंग्रेजी नामो को मलयालम स्वरूप दिया । त्रिवेंद्रम का तिरुवनंतपुरम कर दिया , कालीकट के लिए कोजीकोड कर दिया । जबकि अलेप्पी का अलाप्पुजा और त्रिचूर का थ्रिसर कर दिया !

08 पुना का इतिहास

पुना वास्तव में सन 1870 के दशक में खोजा गया खेल था । जिसे poona कहा जाता था । उद्यान में मेरीगोल्ड के फूल आमने सामने फेंकते समय ख्याल आया कि नाजुक फूल के बदले पक्षी के मजबूत पंखों का इस्तेमाल करना चाहिए । मख्खी मारने के लिए जालीदार साधन का इस्तेमाल इस खेल में किया गया। पंख लिए गए cock के ! जिसे शटलिंग के अनुसार खेला गया । आने जाने वाले उस फूल का नाम श्टलकुक पड़ा ! ये नया खेल भारत मे पुना कहा जाता था । इंग्लैंड जाकर अंग्रेजो ने इसके नियम बनाये ! बाद में पहली बार अयोजनपूर्वक की मैच ड्यूक ऑफ ब्युफोर्ट के गलौस्टेस्टरशायर के परगने में बैडमिंटन में खेला गया । लेकिन स्वभाव के अनुसार अंग्रेजो ने पुना के बदले बैडमिंटन पर ज्यादा जोर लगया और खेल बन गया बैडमिंटन । जो वास्तव में तो पुना था !

09 पहली अंग्रेजी व्यापारी मथक की स्थापना

कलकत्ता

प्रचलित ख्याल ऐसा है की ईस्ट इंडिया कंपनी के अंग्रेजो ने रॉबर्ट क्लाइव की अगवाई में पहला भारतीय प्रदेश बंगाल में पाया था । हालांकि हक़ीक़त एकदम अलग है । सन 1640 में मद्रास में जमीन हस्तगत करके वहाँ फोर्ट सेंट ज्योर्ज नाम का किल्ला बनाया था । जब क्लाइव का जन्म भी नही हुआ था तब 1757 में ईस्ट इंडिया कंपनी के सीनियर कर्मचारी ने बंगाल की हुगली नदी के किनारे व्यापारी मथक की स्थापना की थी । जो शरुआत थी । कलकता का स्थापक माना जाता और साल के 20 पाउंड की सेलेरी लेने वाला वह अंग्रेज कर्मचारी जॉब चारनॉक था !

आज के कैलेंडर के मुताबिक सितम्बर 3 , 1690 में उसने व्यापारी केंद्र खोला था । सामने के किनारे पोर्तुगीज का केंद्र था । फ्रेंचो ने भी चंद्रनगर में केंद्र खोला था । सन 1693 जॉब की मृत्यु हो गई । उसी के नाम से जाना जाता chornokkite ग्रेनाइट पथ्थर से बनाया गया। आज वह स्मारक कलकत्ता का सबसे पुराना स्थापत्य कहा जाता है ।

10 भारत के ट्विन शहर

ट्विन्स शहर

दिल्ही – नई दिल्ही , जमशेदपुर – तातानगर , कुलु – मनाली , नवसारी – जलालपुर , तिरुपति – तिरुमला , भरतपुर – केवलादेव , हैदराबाद – सिकंदराबाद , मथुरा – वृंदावन , लखीमपुर – खेड़ी , नासिक – देवलाली और सोमनाथ – पाटन भारत के ट्विन शहर है ! जो पहले तो अलग थे लेकिन विस्तार बढ़ने से एक हो गए !

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