भारत के विभाजन की Top 10 हक़ीक़त

भारत के विभाजन की Top 10 हक़ीक़त

भारत को आजादी मिलि 1947 , 15 अगस्त के दिन ! एक तरह से यू भी कह सकते है कि भारत नव उसका विशाल पश्चिम हिस्सा गवा दिया । दो सौ सालों तक अंग्रेजो ने अखण्ड भारत पर राज किया। आखिर में 15 , अगस्त 1947 के दिन भारत से विदा हुए लेकिन भारत के दो टुकड़े करते गए। ये ट्रेजिक घटना के बारे में आज हम बात करेंगे और जानेंगे Top 10 हक़ीकत !

01 भारत का नया नक्शा

भारत को आजदी मिली उसके पोने दो साल पहले ब्रिटिश सरकार ने तय कर दिया था कि हिन्दू मुस्लिम के धोरण पर भारत के टुकड़े करेंगे । लेकिन विभाजन दर्शाने वाली सरहद रेखा बनाने की कोई जल्दी नही थी । स्वतंत्रता दिन आने में अब 38 दिन बाकी थे तब जाकर जुलाई 8 , 1947 के दिन एक गोरा अंग्रेज न्यायाधीश 40,79,527 वर्ग किलोमीटर के भारतीय उपखंड का नक्शा बनाने के लिए दिल्ही आया। यह बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य पूरा करने के लिए उसके पास सिर्फ 900 घण्टे जितना समय था ।

भारत का नया नक्शा

लेकिन ये काम उसने यू चुटकी में पूरा कर दिया । उसका नाम था सिरिल रेडक्लिफ ! ये कार्य के लिए कई भारतीयों को वह अयोग्य लगा था , क्योंकि रेडक्लिफ ने कभी पहले धरती पर पैर तक नही रखा था । भारत के बारे में उसका ज्ञान शून्य से थोड़ा ही ज़्यादा था। रेडक्लिफ जब भारत आने के लिए निकला उसके थोड़े दिन पहले लंदन के ‘ इंडिया हाउस ‘ में एक राजद्वारी अमलदार ने सिर्फ आधे घण्टे की बैठक में उसे वह ज्ञान दिया था । सच कहें तो सिरिल रेडक्लिफ भारत के बारे में ज़्यादा कुछ जानता ही नही था । अजीब बात है यही चीज उसकी अयोग्यता नही बल्कि लायकात थी । बिना किसी तरह के पूर्वग्रह बिल्कुल तठस्थ रूप से सरहदरेखा बना सकता था !

02 राज्य की विचित्र मांग

महमद अली जिन्ना का मुस्लिम लीग पक्ष ने पाकिस्तान बनाने के लिए सरहदी प्रान्त , बलूचिस्तान , सिंध , पंजाब और बंगाल के साथ और राज्य की मांग की जिसका क्षेत्रफल ही 1,74,400 वर्ग किलोमीटर था।

पूर्वीय भारत का हिस्सा आसाम का राज्य

ये राज्य था आसाम ! जिन्ना उसे भी पाकिस्तान में शामिल करना चाहते थे । सन 1941 कि बस्ती गिनती के अनुसार आसाम की बस्ती उस समय 1,02,04,733 थी । जिसमे मुस्लिम की संख्या लगभग 35 % जितनी थी । सिरिल रेडक्लिफ ने आसाम का मुस्लिम बहुमति वाला सिलहट जिले का पूर्व भाग पाकिस्तान को दिया । बाकी का आसाम भी उसने पाकिस्तान के हवाले किया होता तो हमारे भारत के लियर ईशान में कुछ बचता ही नही । क्योंकि seven sister कहे जाने वाले सात इशानी राज्य आज भी भारत मे नही होते । क्योंकि नागालैंड , मिजोरम , अरूणाचल प्रदेश , मणिपुर , त्रिपुरा और मेघालय के वर्तमान पहाड़ी प्रदेश उस समय आसाम के हिस्से थे ।

03 खनिज समृद्धि का विभाजन

धन की तस्वीर

जिन्ना के मुस्लिम लीग पक्ष ने कोमवाद के आधार पर देश का विभाजन करवाया था । उसमें पाकिस्तान के आर्थिक हित को बड़ा नुकसान हुआ था । सबसे ज्यादा मूल्य खनिजों का था । अखंड भारत के टुकड़े होने के बाद भारत के सिर्फ 5 % खनिज भंडार उसे मिला । पेट्रोलियम , कोयला , लोहा , एल्युमिनियम , बॉक्साइट , तांबा , अबरख , मेंगेनिज और टाइटेनियम जैसे महत्व के खनिज उसके हिस्से में गई भूमि में नही थे ।

04 पंजाब का बदला गया नक्शा

अगस्त 8ब, 1947 के दिन सिरिल रेडक्लिफ ने जो नक्शा फाइनल किया उसमे पाकिस्तान के लगभग 2/3 पंजाब का हिस्सा दिया था । फिरोजपुर, भटिंडा , फरीदकोट वैगेरह शहर और गांवों के महत्वपूर्ण प्रदेश पाकिस्तान के हिस्से में गए थे । इस नक्शे की कोपी उसने मुस्लिम लीग के नेताओ को देखने के लिए दिया । चार दिन बाद रेडक्लिफ ने नक्शा बदल दिया । लेकिन क्यों ?

पंजाब का विभाजन

तो हुआ था यू की सिरिल रेडक्लिफ के सरहदी पंच में मददनिश सेक्रेटरी रावसाहब वी डी अय्यर थे । फ़िरोजपुर , भटिंडा , फाजिल्का , जीरा , फरीदकोट और जलालाबाद वैगेरह पाकिस्तान के हिस्से में गए थे ये नक्शे में देखा । इसलिये उनको तो झटका सा लगा । सतलज नदी का एकमात्र पुल बीकानेर राज्य को पानी देती गंगा नहर का सतलज नदी की ओर का छोर और सतलज की पूर्वी रसाल भूमि वैगेरह पाकिस्तान में जा रहे थे। रावसाहब अय्यर ने सरदार पटेल के मददनिश वी पी मेनन को बात बताई । बाद में माउंटबेटन को समाचार मिले । और रातोरात नक्शा बदला गया । ये सब खानगी ही रहा । माउंटबेटन के संचार का मामला सन 1992 में जांहिर हुआ ।

05 जिन्ना की विचित्र शर्त

अखण्ड भारत के टुकड़े होने के बाद ही आजादी का जन्म होगा ये बात तो तय ही थी । लेकिन महमद अली जिन्ना के नए देश पाकिस्तान का जन्म ही दो टुकड़ों के बाद हुआ । दुनिया के नक्शे पर कही और देखने ना मिले इस हद तक सरहद विकृत थी । पश्चिम पाकिस्तान के बीच कम से कम 1280 किलोमीटर का फांसला था। पश्चिम में करांची से उसका वहीवटी करने में मुश्किल होती थी । इसलिए जिन्ना ने विभाजन की ब्ल्यूप्रिन्ट मान्य रखने से पहले एक विचित्र शर्त रखी !

महमद अली जिन्ना

वह भी इस हद तक कि आपके होश उड़ जाएंगे ! वह ये की पश्चिम पाकिस्तान और पूर्व पाकिस्तान के बीच भूमि रास्ते से संपर्क रह सके उस लिए जनाब महमद अली जिन्ना ने भारत की आरपार निकलती 1280 किलोमीटर लंबी कॉरिडोर मांगी !!! पक्की सड़क पाकिस्तान की मालिकाना मानी जाती , सीधी बात भारत का उस पर कोई अधिकार नही ! तो उसे क्रॉस करने के लिए नियत मार्ग से ही निकलना रहा । इस बेहूदी मांग को आगे करके जिन्ना ने अपनी मोटी बुद्धि का प्रदर्शन किया था । तो माउंटबेटन उसके बारे में चर्चा या विचार करने के लिए भी तैयार थे।

06 देश का विभाजन

देश का विभाजन हो ये बात गाँधीजी समेत अनेक लोगों को पसंद नही थी । करोड़ो हिन्दू और मुस्लिम उनके घर , दुकान , खेत , वैभवशाली सामान और अपनी मालिकी के फ़्रेक्टरी को छोड़कर पहने हुए कपड़े के साथ घर से निकल जाना था । कुछ राजा महाराजा उनके पसंद के देश मे राज्य को विलीन नही कर पा रहे थे । देश के 90 % शिख जहां बस्ते थे उस पंजाब के भी दो टुकड़े होने वाले थे । और वे हिन्दू मुस्लिम की खींचातानी के लिये बिल्कुल जिम्मेदार नहीं थे। कुछ लोगो को लगता था कि विभाजन जिन्ना की जिद के कारण हुआ ।

भारत पाकिस्तान का विभान

तब एक विचारक ने ब्रिटिश वाइसरॉय माउंटबेटन को थोड़ा समय राह देखने की सलाह दी । सलाह का अर्थ था थोड़े समय बाद ना रहेगा बांस और ना बजेगी बांसुरी ! की स्थिति होगी । मतलब ये की महमद अली जिन्ना को टीबी था । डॉक्टरी निदान के अनुसार वे दस महीने से ज्यादा समय जिंदा नही रहने वाले थे। नसीब से वे 13 महीने जिंदा रहे । सितम्बर 11 , 1948 के दिन उनकी तबियत अचानक बिगड़ गई । और रात 10:20 बजे उनकी मौत हो गई । सिर्फ अपनी जिद पूरी करने के लिए उन्होंने जिस देश का सृजन करवाया । उस पर लंबा शासन चलाने का आनन्द उनको नही मिला । शायद माउंटबेटन ने भारत का विभाजन का प्रस्ताव थोड़े समय के लिए विलंब में डालते तो शायद विभाजन नही होता । लेकिन सच तो ये है अंग्रेज हमेंशा विभाजन करके दोनों देशों में दुश्मनी बनानकर हमेंशा के लिए झगड़ा करने के लिए छोड़ने के आदि थे । तो ये विभाजन तो होना ही था ।

07 नया कैलेंडर

अगस्त 15 , 1947 की दिनांक तय होने के बाद ब्रिटिश हिन्द के आखरी वायसरॉय लुइस माउंटबेटन को लगा कि भारत और पाकिस्तान के बीच मिलकत , शस्त्र , रेलवे की , नगद धन और दूसरी हजारो चीजो का बंटवारा बहुत कम समय मे हो रहा था । एक एक दिन उनको कीमती लगा । बटवारे का काम करने वाले अमलदार समय के काउंटडाउन के प्रति सभान रहे इस लिए जून 3 , 1947 के दिन हरेक के लिए खास कैलेंडर दिया । ये मामूली कैलेंडर नही था ।

कैलेंडर

इस कैलेंडर में छपी दिनांक का क्रम उल्टा था । वास्तव में तारीख थी ही नही । हरेक चिठ्ठी में बड़े टाइप में 73 ,72 , 71….ऐसे कम होते क्रम में अंक छपे थे। अगस्त 15 , 1947 के दिन वाली चिठ्ठी में सिर्फ X लिखा था ।

08 कौमी हुल्लड़ को रोकने के लिए कितने सैनिक ?

सैनिक

पाकिस्तान से 73 लाख हिन्दू अगस्त 15 , 1947 के आसपास भारत आये । जब भारत मे रहते 72 लाख मुस्लिम पाकिस्तान गए। दोनों कौम के शरणार्थी के झुंड के बीच खूनी दंगे ना हो इसलिये ब्रिटिश सेनापति फील्ड मार्शल क्लोड ओचिंलेक ने सरहद पर पूरे 55,000 जी हाँ , पूरे 55,000 सैनिक तैनात किये थे । अब दोनों कौम के शरणार्थी की संख्या को ध्यान में ले तो हरेक सैनिक के 750 हिन्दू मुस्लिम का रक्षण करना था । परिणाम जो हत्याकांड हुआ उस मे लाखो शरणार्थी मारे गए । दूसरी ओर पूर्वी सरहद पर सिर्फ One Man Boundary Force था , फिर भी वातावरण शांत था । क्योंकि उसका नाम था गांधीजी था – जो लोगों के बीच कौमी इखलास रहे उसके लिए उपवास पर बैठे थे।

09 मुस्लिम की बहुमति

मुस्लिम का चिन्ह

पूर्व बंगाल का 1,44,000 वर्ग किलोमीटर का प्रदेश अगस्त 15 , 1947 के दिन पूर्व पाकिस्तान बना । क्योंकि वहां पर मुस्लिम प्रजा की बहुमति थी । लेकिन कितनी ? तो सन 1941 की बस्ती गिनती के अनुसार पुर्व
बंगाल कुल जन संख्या 4 , 19, 50 , 000 थी । जिसमे हिन्दू प्रजा 1 ,18, 00,000 जितनी थी । यानी कि 28% ! बांग्ला देश के नाम के उस देश को इस्लामी प्रजासत्ताक बनानी की इच्छा वाले वहां के शासकों ने अनेक हिन्दू धर्म के परिवारो को वहां से निकाल दिया ।

10 भारत का वह प्रान्त जो आज पाकिस्तान में है !

भारत का प्रान्त

लगभग 75 लाख वर्ग किलोमीटर का एक प्रान्त हाल पाकिस्तान के बदले भारत का हिस्सा होता , अगर जवाहरलाल नेहरू की कोन्ग्रेस ने वहां जनमत लेने की गलती ना कि होती । प्रान्त की कुल बस्ती के 10 % के अनुसार 5,75,000 लोग मत दे सकते थे । अजीब बात है कि मुस्लिम बस्ती होने के बावजूद प्रजा का बड़ा हिस्सा भारत से जुड़ना चाहता था । इसलिये उन्होंने जनमत का बहिष्कार किया । लेकिन जब जनमत का रिजल्ट घोषित किया तो 2,89,000 लोग पाकिस्तान के साथ जुड़ना चाहते थे और 2950 भारत के साथ रहना चाहते थे । बहिष्कार करने वालो ने मत दिया होता तो परिणाम कुछ अलग होता ! और जब वो सब मत देते तो भारत का जुमला 2,80,000 बढ़ जाता और जो 9000 मत से वह रिजल्ट आया वह कुछ अलग होता । यह प्रान्त था NWFP ! यानी North West Frontier Province ! जो आज पाकिस्तान का हिस्सा है ।

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