भारतीय एयरलाइंस की 10 ऐतिहासिक हक़ीक़त

भारतीय एयरलाइंस की 10 ऐतिहासिक हक़ीक़त

एयरलाइंस कंपनी की बात करे तो आज तो भारत मे भी इतनी सारी बढ़ गई है कि आज पायलट की कमी सता रही हैं । तगड़ा सेलेरी पैकेज ऑफ़र होने के बावजूद आज भी पायलट की कमी तो है ही ! दूसरी ओर प्लेन में सफर करने वाले लगातार बढ़ते जा रहे हैं । तो उनको न्याय देने के लिए ज्यादा विमान खरीदे जा रहे हैं लेकिन सवाल ये है कि चलाने वाले पायलट के बिना क्या करे ! अब ये तो हुई आज की बात लेकिन आज की एयरलाइंस इस तरह से यू ही नही बन गई ! उनका गुजरा हुआ कल बहुत ही रोचक है । चलिये जानते हैं ।

01 विमान का रिफ्यूलिंग बैल गाड़ी से !!!

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भारत की सर्व प्रथम एरलाईन्स

भारत की सर्वप्रथम स्वदेशी एयरलाइंस के लेपर्ड मोथ प्रकार के विमान जब लेंडिंग करते थे तो बैलगाड़ी में पेट्रोल के पिप लेकर बर्मा शेल कंपनी के कर्मचारी विमान की टंकी में ईंधन भरते थे । अब ये एयरलाइंस कोई सामान्य एयरलाइंस नही थी । सन 1932 में जे आर डी ताता ने 15 अक्टूबर 15 , 1932 के दिन ताता एयरलाइंस की स्थापना की जो भारत की सर्वप्रथम एयरलाइंस थी । उद्घाटन से समय ताता ने खुद उस दिन 120 हॉर्स पावर के पस मोथ नाम के विमान में बैठकर करांची से मुंबई वाया अहमदाबाद उड़े थे । शरुआत में ताता एयरलाइंस के पास 1 पस मोथ और 1 लेपर्ड मोथ थे । एक ही फूल टाएम पायलट था । मुख्य ऑफिस ताड़पत्री के नीचे खुली जगह में थी । अगस्त 1990 में ताता एयरलाइंस के नाम बदलकर ऐर इंडिया रखा गया !

02 ऐर सर्विसिस ऑफ इंडिया

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भारत की ऐर सर्विसिस ऑफ इंडिया

ऐर सर्विसिस ऑफ इंडिया की स्थापना पुरुषोत्तम मेघजी नाम के काठियावाड़ी मुंबई बसने वाले व्यापारी ने की थी । दूसरे विश्वयुद्ध में कारोबार बंद रहा था लेकिन मे 3 , 1946 के दिन डाकोटा विमान के साथ फिर से शरू किया गया । पुरुषोत्तम मेघजी भी ताता की तरह भारत को विमान युग मे ले जाना चाहते थे । इसलिये सन 1978 में वड़ा प्रधान मोरारजी देसाई ने उनकी याद में मुंबई के वालकेश्वर में एक रास्ते का नाम पुरुषोत्तम मेघजी रॉड घोषित किया । सन 1997 में लोनावला के एक रास्ते को भी उनका नाम दिया ।

03 भारत की आज की एयरलाइंस !

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भारत की आज की एरलाईन्मिस

भारत मे आज लगभग 44 एयरलाइंस है । जब की विमान सब मिलकर 1050 जितने है । सबसे बड़ी एयरलाइंस इंडियन एयरलाइंस है जिसमे 100 से भी ज्यादा विमान है । जेट एयरवेज के पास 60 से ज्यादा विमान है । उसका नंबर दूसरा है ।

04 विमान के बदले हवाई जहाज से सफर !

ताता एयरलाइंस ने सन 1932 में अपना कारोबार शरू किया उससे पहले ब्रिटन की इम्पीरियल एयरवेज के विमान लंदन से करांची से दिल्ही का प्रावस करते थे । सफर के दौरान 19 जगह रुकना पडता था , 20,000 किलोमीटर की यात्रा करनी पडती थी जिसमे 19 दिन लग जाते थे । फिर भी फ्लाइंग का समय तो 63 घन्टे से ज्यादा नही होता । अब ज्यादा न रुकना पड़े इसलिए ब्रिटन ने दो देशों के बीच विमान रहित ऐर सर्विस शरू की । विमान के बदले दूसरा वाहन बनाया गया । जो था हवाई जहाज !

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विमान के बदले इस्तेमाल किया गया हवाई जहाज

ब्रिटिश सरकार ने भारत को अपने साम्रज्यवाद का ताज मानती थी । भारत के साथ तेजी से परिवहन लिंक बनाने के लिए ब्रिटन ने R 100 और R 101 नाम के दो हवाई जहाज बनाये । जिसमे हजारो घन मीटर हाइड्रोजन भरा जाता था । दोनों हवाई जहाज बार बार ईंधन मांगे बिना लंबा सफर कर सकते थे । अक्टूबर 1930 में R 101 करांची से मुंबई आने के लिए निकला ! उस जहाज की वह पहली यात्रा थी । इंग्लिश चैनल पार करने के बाद फ्रांस में ही उसके ज्वलन शील हाइड्रोजन के कारण वह जल गया । 50 मुसाफिरों में से केवल 7 बच पाए । बाद में दूसरे हवाई जहाज को भी भंगार में दे दिया । बाद में विमान से ही हवाई सफर चालू रखा गया ।

05 भारत की सबसे Lowest cost एयरलाइंस

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हवाई यात्रा कराने वाले विमान

अगस्त , 2003 में बनी ऐर डेक्कन भारत की सबसे Lowest cost एयरलाइंस है । जिसने शरुआत में केवल 1 ₹ की टिकट से सफर करवाना शरू किया । चारो ओर तहलका मचा दिया था । आज की GOair , Spicejet, Kingfisher जैसी एयरलाइंस नीचे दाम रखकर ज्यादा मुनाफा करती हैं । इस तरह की एयरलाइंस को no frills airlines कहा जाता है क्योंकि ऐसी एयरलाइंस उनके पेसेंजरो को मंजिल पर पहुंचा ने अलावा कोई सुविधा नही देती । यहाँ पर खिड़कियों पर पर्दे तक नही लगाती। जिसे अंग्रेजी में fril कहा जाता हैं । हमारे भारत के किसी देश मे उसकी ऑफिस नही होती । बुकिंग ऑनलाइन होता है । मुसाफिरों को भोजन नही दिया जाता। रोज के इनके प्लेन लगातार 11 घण्टे उड़ते है जबकि सरकारी एयरलाइंस के विमान 9 घण्टे ! लेंडिंग के बाद पेसेंजरो के साथ प्लेन टेकऑफ भी जल्दी हो जाता है । क्योंकि खाना व अन्य चीजो के बंदोबस्त की जरूरत ही नही होती । इस तरह से वे दस से बारह सेवा को काटकर बहुत सारा खर्च बचा लेते हैं ।

06 सरकारी एयरलाइंस

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सरकारी एरलाईन्स ला समय

भारत एयरवेज , हिमालयन एविएशन , डेक्कन एयरवेज , ऐर सर्विसिस ऑफ इंडिया , कलिंग एयरलाइंस , इंडियन नेशनल एयरवेज , ऐर इंडिया लिमिटेड जैसी भारत मे कई प्रयावेट ऐरलाइंस थी । इन सब को भारत सरकार ने अगस्त 1 , 1953 के दिन ऐर कोर्पोरेशन एक्ट नाम के कानून के तहत राष्ट्रीयकरण कर दिया । इन सब एयरलाइंस के बीच स्पर्धा हो और उस चक्कर के टिकट के दाम कम होने पर सामान्य लोग भी हवाई सफर कर पाए ये मुमकिन नही रहा । जब कि दूसरी और सरकार की ऐर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस ने तो नुकशान ही किया था । आख़िर में सन 1990 के दशक में सरकार ने ओपन स्काय पालिसी अपनाई और उसी के साथ कई प्रयावेट कंपनियां मैदान में आ गई । सफर के लिए ट्रेन की फर्स्ट क्लास की टिकट से कम कीमत पर हवाई सफर शरू हुई ।

07 भारत की पहली अंतरराष्ट्रीय फ्लाईट

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पहली बार अंतरराष्ट्रीय फ्लाईट उड़ने वाले केप्टन

भारतीय विमान ने पहली बार आंतरराष्ट्रीय फ्लाईट सन 1949 की थी । पायलट का स्थान पति ने संभाला हो और पत्नी ने को पायलट का तो ऐसा किस्सा एक ही हुआ जब 3,00,000 ₹ कीमत में डोव प्रकार के विमान ने मद्रास से लंदन तक का प्रवास लगभग 27 घण्टे में किया।
कैप्टन वी सुंदरम और उनकी पत्नी उषा सुंदरम ने भारत आजद होने के बाद ये कारनामा किया था । वी सुंदरम ने सरदार के साथ देशी राज्यो के विलीनीकरण के लिए पूरे भारत का प्रावस किया था ।

08 एयरलाइंस विमान को lease / लीज पर या dry lease पर लेती हैं !

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लीज पर विमान !

कई प्रयावेट कंपनियों के विमान उनकी मलिकी के नही होते बल्कि कंपनियां उन्हें lease / लीज पर या dry lease पर लेती हैं ! जिसमे पायलट समेत भाड़े पर लिया गया विमान wet lease कहा जाता हैं और पायलट रहित विमान को dry lease कहा जाता है । जो लंबे समय के लिए किए जाते है । विदेशी पायलट को महिने के 5,00,000 ₹ तक का पैकेज दिया जाता हैं । जबकि भारत के पायलट को 3,00,000 ₹ तक का पैकेज मिलता हैं । हालांकि इसमें समय व आर्थिक स्थिति अनुसार बदलाव होते रहते हैं ।

09 विमान के नाम !

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विमान के भी नाम !

हरेक एयरलाइंस अपने विमान को नाम देती है जैसे कि ऐर इंडिया ने भी एक समान सीरीज के विमानों को नाम दिए है । जैसे कि सन 1948 में सुपर कॉन्सटेलेशन प्रकार के जो विमान खरीदे उनको मलबार प्रिंस , कश्मीर प्रिंसेस और मुग़ल प्रिंसेस जैसे नाम दिए । राजकुमार की सीरीज के बाद खरीदे गए जम्बो जेट बोइंग 707 विमानों को अन्नपूर्णा , कंचनजंघा , गौरी शंकर , नंदा देवी जैसे नाम दिए। बोइंग 747 के लिए सम्राट अशोक , सम्राट विक्रमादित्य , स्मार्ट चंद्रगुप्त , सम्राट कनिष्क और सम्राट हर्षवर्धन जैसे नाम पसंद किए । किसी सटीक विषय , वस्तु या वस्तु विशेष से जुड़े नाम रखने की प्रथा आज भी चालू है ।

10 पायलट का ट्रेनिंग स्थान

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विमान के पायलट की ट्रेनिंग

हाल भारत मे हजारो पायलट की आवश्यकता है । उमेदवार पायलट को जहां TB- 20 और C- 90A विमानों से श्रेष्ठ तालिम दी जाती है वह स्थान है उत्तर प्रदेश की एकमात्र ट्रेनिंग संस्था राय बरेली में आई है । जिसका नाम है इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान एकेडमी , जहाँ से हर साल 35 से 40 उमेदवार पायलट की तालीम पाते हैं । इसके अलावा देशभर में सब मिलाकर 39 फ़्लाइट क्लब और पायलट तालीमी संस्थाएं है ।

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