फर्स्ट टाएम इन इंडिया की 12 घटनाएं

फर्स्ट टाएम इन इंडिया की 12 घटनाएं

01 ट्राम

ट्राम

हमारे देश मे मोनोरेल का आगमन हुआ उसके पहले हमारे यहां ट्राम का जमाना था । देश की सबसे पहली ट्राम की शरुआत फ़रवरी 24 , 1873 के दिन हुई । कलकत्ता के आर्मेनियन घाट और सिल्हाद के बीच ये ट्राम शरू की गई थी । मीटर गेज़ की पटरी का ट्रेक लगभग 4 किलोमीटर लंबा था । तीन डिब्बे वाली ट्राम को 6 घोड़े खींचते थे । लेकिन ये सर्विस प्रेक्टिकली रूप से सफल न होने के कारण दस महीने बाद उसे बंद कर दिया गया था ।

उसी साल मुंबई में उसी साल अंग्रेज प्रोमोटरों ने बॉम्बे ट्राम वे कंपनी की स्थापना की । मे 9 , 1874 के दिन पहली नियमित ट्राम सर्विस शरू की गई । अब ट्राम की बात करें तो उस दिन से मुम्बई में कुल मिलाकर 20 ट्राम और 200 घोड़े के साथ इसकी शरुआत की गई । सन 1905 में जब बॉम्बे ट्राम वे को बंद किया तब उसके पास 1360 घोड़े थे ।

02 वड़ा प्रधान के नाम में R अक्षर

मनमोहन सिंह

डॉ मनमोहन सिंह ! जी हाँ , भारत के वडा प्रधान बने जवाहरलाल नेहरू , लालबहादुर शास्त्री , इंदिरा गांधी , मोरारजी देसाईं, चरणसिंह , राजीव गांधी , विश्वनाथ प्रताप सिंह , चंद्रशेखर , नरसिंहराव , हर्दानहल्ली देव गोवड़ा , इंद्रकुमार गुजराल , अटल बिहारी वाजपेयी के नाम मे R अक्षर है । अपवाद है मनमोहन सिंह ! उनके पुरोगामी हरेक के नाम मे ये अक्षर हैं !

03 पहला red delicious American सेब

सेम्युअल इवान स्टोक्स

सेब में सबसे बहेतरिन माना जाता रेड डिलिशियस अमेरीकन सेब को भारत मे पहली बार एक अमरीकन लाया था । सन 1915 में सेम्युअल इवान स्टोक्स उसे भारत लाया था । शिमला में उसने पहली बार इस रेड दिलीसियस सेब की कलम लाई गई और शिमला में ही उसकी बग़ायत खेती शरू की गई । अगस्त 16 , 1882 में सेम्युअल इवान स्टोक्स अमरिका में अपनी पढ़ाई पूरी करके 22 साल की उम्र में भारत मे बसने आ गया था । कलम लगाने के साथ उसने पूरे हिमाचल प्रदेश को सेब की वाड़ी में बदल दिया ।

इतना ही नही सेम्युअल इवान स्टोक्स पहला अमरीकन था जिसने भारत को स्वतंत्र कराने के लिए लड़त चलाई ! शिमला से 80 किलोमीटर दूर का कोटगढ़ गांव को उसने कर्म भूमि बनाया । हिन्दू धर्म अपनाया , लोगो के साथ घुलने मिलने के लिए उसने अपना नाम सत्यानंद रखा ! उसने जो लड़त चलाई उसके कारण उस पर दिसम्बर 3 , 1921 के दिन ब्रिटिश ने उस पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कर के उसे जेल में दाल दिया !

04 विदेशी धरती पर महात्मा गांधी की पहली क्रिकेट मैच

महात्मा गांधी का मैच

एक बार जब गाँधीजी इंग्लैंड थे तो लंदन में भारतीय स्थानिक लोगों की इलेवन और Marylebone Cricket Cloub / MCC इलेवन के बीच मैच रखी गई थी । गाँधीजी को भी उसमे हिस्सा लेना था । सीधी बात थी कि गाँधीजी भारतीय टीम के ख़िलाडी के रूप में खेलना पसंद था । लेकिन उनको MCC की ओर से खेलने के लिए बिनती की गई। विदेशी धरती पर वह गाँधीजी की पहली क्रिकेट मैच थी । जिसमे उन्होंने 27 रन बनाए ! वे क्लीन बोल्ड होकर आउट हुए । मैच के अंत मे उन्होंने MCC की ऑटोग्राफ बुक में और बेट पर हस्ताक्षर किए । आज भी बेट और ये ऑटोग्राफ बुक MCC के संग्रहालय में है ।

05 भारत का पहला ace pilot

इंद्रलाल रॉय

अब ये ऐर पायलट के बदले कुछ गलती से लिखा नही । ace pilot का मतलब होता है युद्ध के दौरान हवाई लड़ाई में विमान का पायलट दुश्मन देश के कम से कम पांच या उससे ज़्यादा विमान को तोड़ दे तो उसे ace pilot कहा जाता है ।

भारत का पहला ace pilot इंद्रलाल रॉय थे । उन्होंने प्रथम विश्वयुद्ध में आकाशी डॉग फाइट में जर्मनी के 9 विमान को तोड़ दिया था । इस पराक्रम के लिए उनको Dissitinguished Flying Cross/ DFC नाम का सर्वोच्च चंद्रक दिया गया था । जुलाई 22 , 1918 दिन लंदन के आकाश में हुई विमान डॉग फाइट में उनकी मौत हो गई ।

06 भारत में पहली बार सात तोपों की सलामी

मधुसूदन गुप्ता

जनवरी 10 , 1836 के दिन कलकत्ता के फोर्ट विलयम अटारी से सलामी देने के लिए बारी बारी से सात तोपे फोड़ी गई । ये घटना पहली बार भारत में हुआ था । भारत मे बन रही पहली मेडिकल कॉलेज बन रही थी तो ये कार्य जरूरी था । क्योंकि जनवरी 10 , 1836 के दिन कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में मधुसूदन गुप्ता नाम का बंगाली वैद्य नैतिक हिम्मत दिखाकर शवच्छेदन कर रहे थे । हिन्दू धर्म मे अंतिम विधि के सिवाय शव को छू ने की मनाई है । तो उसकी चिर फाड़ का सवाल नही रहता। उस कार्य के लिए अंग्रेजो ने उसे बिरदाया और हिन्दू समाज ने उनका बहिष्कार किया । बंगाल के अंग्रेज ने सभा की । जिसमे सुश्रुत के प्राचीन श्लोकों का संदर्भ शव च्छेदन को सही ठहराकर वैध को बहिष्कार से छुड़ाया !

07 भारत मे कायमी रूप से बसने वाले पहले विदेशी

यहूदी परिवार

भारत मे कायमी रूप से बसने के लिए आने वाले पहले विदेशी यहूदी थे । ईसापूर्व 587 में बेबीलोन ने यहूदी प्रजा का ज्यूडाह देश यानी वर्तमान इजरायल पर कब्जा कर प्रजा पर अत्याचार करना शरू कर दिया था । बेबीलोन ने वहां के तमाम यहूदी को खदेड़ दिया । ज्यूडाह देश का अस्तित्व ही मिट गया । अलग अलग दिशा में गए यहुदिओं का हर जगह से अपमान मिला । उनको the lost tribes कहा गया ।

सन 587 में यहूदी का एक गुट भारत के कोचीन बंदर पर आया । तब से भारत यहूदियो का कायमी वतन बना ।

08 भारत का सर्वप्रथम राजकीय कौभांड

जैसे कौभांड आजादी की ही राह देख रहा था या यूं कहें कि कौभांड के लिए ही आजादी की राह देखी जा रही थी ऐसा सिन इसमे हुआ है । सन 1948 में भारत मे पहला राजकीय कौभांड किया गया । जिसे जीप स्केंडल भी कहा जाता है । ब्रिटन में रहे भारतीय राजदूत कृष्ण मेनन ने वहां की जीप गाड़ी के लिए 80 लाख का सौदा किया था । अब मेनन सिर्फ राजदूत थे , सरकार की ओर से सौदा करने का उन्हें कोई सत्ता नही थी । बेचने वाली कंपनी ने सिर्फ 155 जीप गाड़ी की डिलीवरी दी ! अर्थात मार्केट भाव 7000 ₹ के बदले 51,600 ₹ था । इस कौभांड कि जांच का प्रकरण 1955 समेट कर सरकार ने फाइल बन्द कर दी । नेहरू ने विरोध पक्षो को कह दिया कि आप चाहे तो इस जीप प्रकरण को चुनाव का मुद्दा बनाना चाहे तो बना सकते है । दूसरे साल नेहरू ने मेनन को अपने मंत्री मंडल में समा लिए ।

09 भारत का पहला डिजिटल कम्प्यूटर

पहला डिजिटल कम्प्यूटर

भारत देश मे लोगो ने अभी कम्प्यूटर का नाम तक नही सुना था उस अरसे में भारत मे डिजिटल कम्प्यूटर आयात किया गया था । सन 1956 में 10,00,000 ₹ के खर्च पर ये कम्प्यूटर सरकार ने भारत के प्रसिद्ध पी सी महाबलोनिबस के कहने पर बजट पास करके खरीदा था । आज के आधुनिक कम्प्यूटर के आगे को तो वह मन्काघोडी जैसा था ।

पंच वर्षीय योजना के प्रेणता पी सी महालानोबिस ने इसे पंच वर्षीय योजना की प्लानिंग प्रोसेस के लिए खरीदवाया था । जिसका नाम था HEC-2M ! कलकत्ता की indian statical institute / ISI में रखा गया ये कम्प्यूटर 16 तरह की प्राथमिक गिनती कर सकता था । इंस्टीट्यूट के द्विजेश दत्त मजमुदार पहले भारतीय जो कम्प्यूटर ऑपरेटिंग सीखे ! भारत में पहली बार डिजिटल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होने की ये घटना थी ।

10 पहली बार मताधिकार

पहली बार मताधिकार

लोकशाही के अनुसार मताधिकार देने वाला पहला चुनाव दक्षिण केरल के त्रावणकोर राज्य में आयोजित किया गया । त्रावणकोर के राजा चिथिरा वर्मा ने अपने राज्य को स्वतंत्र बनाना चाहते थे ।
इसलिए मूलभूत रूप से चुनाव बंधारण बनाने के लिए 120 सदस्यों की पसंदगी के लिए किया जा रहा था । राजा ने बाद में बंधारण सभा को ही विधान सभा मे बदल दिया । कोंग्रेस को 97 सीट मिली , और उसके नेता पट्टम थानु पिल्लई त्रावणकोर के मुख्यमंत्री बने । भारत से जुड़ने के बाद जुलाई 1 , 1949 त्रावणकोर – कोचीन ( केरल का पुरोगामी ) राज्य रचा गया ।

11 कोंग्रेस के पहले प्रमुख

पहला कोंग्रेस का प्रमुख

सन 1885 में एलन ह्यूम ने कोंग्रेस की स्थापना की थी । जिसके प्रथम प्रमुख वोमेश चंदर बेनर्जी थे । जो तीन बार ब्रिटिश पार्लमेंट का चुनाव लड़े थे और तीनों बार हारे थे । कोंग्रेस के पहले अधिवेशन में हाजिर रहे 72 प्रतिनिशियो ने उनके नाम सजाया था । आज तो उनका नाम किसी को याद तक नही !

12 स्वतंत्र भारत में होद्दे की प्रथम सौगंध लेने वाला इंसान

माउंटबेटन

अफसोस कि ये सौगंध माउंटबेटन ने लिए थे । अगले दिन तक वे ब्रिटिश हकूमत के वायसरॉय थे । सौगंध लेने के बाद वे भारत के गवर्नर जनरल बने । पंडित नेहरू और सरदार पटेल से भी पहले देश के सर्वोच्च पद के लिए उन्होंने शपथ लिए ये भारत का कमनसीब था। भारतीय के लिए गवर्नर जनरल बनने की बारी आई जून 21 , 1948 के दिन ! इतना ही नही उसके बाद भी सालो तक भारतीय सेना के सेनापति के पद पर अंग्रेज रहे । अप्रेल 22 , 1958 तक नौकादल दल के सेनापति अंग्रेज थे ।

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